दिल्ली के बाद देहरादून में भी लगेगी पवित्र बौद्ध अवशेषों की प्रदर्शनी: सतपाल महाराज

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भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को 127 वर्षों के बाद 30 जुलाई, 2025 को हांगकांग में नीलामी से बचाकर वापस भारत लाया गया।

राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन मंत्रियों के सम्मेलन’ का अंतिम दिन

देहरादून,उदयपुर। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने उदयपुर, राजस्थान में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन मंत्रियों के सम्मेलन’ के अंतिम दिन कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक और प्राकृतिक धरोहरों के विषय पर भी चर्चा की। बातचीत के दौरान केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने उन्हें बताया कि भारत के पवित्र बौद्ध पिपरहवा अवशेषों को 127 वर्षों के बाद स्वदेश लाया गया है। जिनकी शीघ्र ही नई दिल्ली में प्रर्दशनी लगाई जायेगी। प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने उक्त प्रदर्शनी को देहरादून में भी आयोजित करने का केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को 127 वर्षों के बाद 30 जुलाई, 2025 को हांगकांग में नीलामी से बचाकर वापस भारत लाया गया। यह अवशेष न केवल अतीत के अंशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि भारत की स्थायी सांस्कृतिक विरासत और सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का भी एक सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेश लाये गये भगवान बुद्ध के इन पवित्र पिपरहवा अवशेषों की प्रदर्शनी का शीघ्र ही नई दिल्ली में आयोजन किया जाएगा जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने केन्द्रीय मंत्री  शेखावत से अनुरोध किया है कि देहरादून में बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय से जुड़े और बुद्ध को मानने वाले लोग हैं इसलिए भगवान बुद्ध के अवशेषों से संबंधित प्रदर्शनी को देहरादून में भी लगाया जाना चाहिए। जिससे केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार करते हुए देहरादून में भी भगवान बुद्ध के अवशेषों की प्रदर्शनी लगाने की सहमति दी है।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को 127 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद वापस लाने के लिए सफलतापूर्वक नीलामी रोकी। यह कदम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 

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