Join our community of SUBSCRIBERS and be part of the conversation.
To subscribe, simply enter your email address on our website or click the subscribe button below. Don't worry, we respect your privacy and won't spam your inbox. Your information is safe with us.
पर्वतीय और मैदानी के बीच बाँट कर प्रदेश की एकता और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की नाकाम कोशिशे कर रहे हैं उससे सावधान रहने और बचने की जरुरत है: लक्ष्मी अग्रवाल
कई आंदोलनकारी को किया गया सम्मानित
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य स्थापना, रजतोत्सव के अवसर पर पर्वतीय मैदानी एकता मंच प्रदेशभर में राज्य आंदोलनकारियों को सम्मानित करने और पहाड़ी मैदानी एकता का संकल्प लेने का “शहीद सम्मान समारोह वीक” आयोजित कर रहा है।
इसी शृंखला में देहरादून में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया जिसमें आंदोलनकारी शहीदों को नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों के परिवारजनों को सम्मानित किया गया।
“शहीद सम्मान समारोह वीक” में आज आनंदी नेगी,उर्मिला देवी, मीना देवी,शत्यावती देवी,सुलोचना पंत, शकुन्तला देवी, देवेश्वरी देवी,यशोदा देवी , पदमा रावत,सुरेशी सकलानी,परमेश्वरी देवी, प्रमिला पंत एवम कौशल्या पंत को सम्मानित किया गया।
सशक्त और सामाजिक एकता की मिसाल बने उत्तराखंड को पर्वतीय मैदानी भाईचारे के साथ मिलकर सर्वोत्तम उत्तराखंड बनाने का संकल्प दोहराया गया।
वही आंदोलनकारियों ने एक सुर में कहा कि प्रदेश का निर्माण हमारे शहीदों ने अपनी जान देकर किया था और उनके सपनों का उत्तराखंड बनाना आज भी हमारी जिम्मेदारी है। क्योंकि उनके सपने आज भी अधूरे है जिसको सभी लोग मिलकर पूरा करेंगे। सम्मान समारोह में पर्वतीय मैदानी एकता मंच की महासचिव और ट्री वीमेन के नाम से मशहूर लक्ष्मी अग्रवाल ने आये आंदोलनकारियों से आह्वान किया कि वो उत्तराखंड के शिल्पकार हैं इसलिए उनके अनुभव , विचार और सुझाव प्रदेश हित में हमेशा बहुमूल्य रहे है। उन्होंने कहा कि आज जो लोग प्रदेश को पर्वतीय और मैदानी के बीच बाँट कर प्रदेश की एकता और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की नाकाम कोशिशे कर रहे हैं उससे सावधान रहने और बचने की जरुरत है। लक्ष्मी अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान बहुत बार ऐसे मौके आए, जब देश ने देखा था कि जन आंदोलन और जन एकता से बढ़कर कोई ताकत नहीं होती है और वही इतिहास बनाते हैं।