2030 तक नॉन- फॉसिल फ्यूल माध्यम से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन करने और कार्बन सघनता में 50 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य है
सौर कौथिग के साथ हम जन-जागरूकता के लिए कई नए प्रयास भी शुरू करने जा रहे हैं: प्रबंध निदेशक
देहरादून। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक ने प्रेस वार्ता की उन्होंने बताया कि 2030 तक नॉन- फॉसिल फ्यूल माध्यम से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन करने और कार्बन सघनता में 50 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य है।
इनमें से 100 गीगावॉट बिजली सोलर से उत्पादित करने का लक्ष्य है, जिसमें रूफटॉप सोलर 30 गीगावाट है।
अब तक रूफटॉप सोलर के तहत 11 गीगावाट क्षमता स्थापित की जा सकी है।तो इसी राष्ट्रीय लक्ष्य में उत्तराखंड भी अपना योगदान बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
सौर कौथिग के बारे में कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां दूसरे राज्यों की तुलना में अलग हैं।
एक पहाड़ी राज्य होने के नाते यहां पर यूटिलिटी स्केल के सोलर के लिए जमीन की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण है
यहां के लिए रूफटॉप सोलर सबसे उपयुक्त है, जिससे लोगों की घरों की छत का इस्तेमाल करके सौर ऊर्जा का दोहन किया जा सकता है।
प्रदेश सरकार ने सौर ऊर्जा नीति 2023 में इस महत्व
को समझा।
सौर ऊर्जा नीति 2023 में 2027 तक 1400 मेगावाट वितरित सोलर क्षमता पाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसमें से आवासीय क्षेत्र में 250 मेगावाट, व्यवसायिक और औद्योगिक क्षेत्र में 750 मेगावाट, संस्थागत क्षेत्र में 350 मेगावाट, कृषि क्षेत्र में 50 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता लगाने और 300 गांवों को सौर संपन्न बनाने का लक्ष्य है
रूफटॉप सोलर पर पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र की सब्सिडी के अलावा उत्तराखण्ड सरकार अलग से सब्सिडी दे रही है।
तीन किलोवॉट तक के सोलर सिस्टम पर केंद्र से 85 हजार 800 रुपये, जबकि राज्य सरकार से 51 हजार रुपये सब्सिडी मिलती है
वहीं उन्होंने कहा कि शासन ने प्रदेश में सोलर वेंडर की उपलब्धता को बढ़ाने का काम किया है। पूरे प्रदेश में आवासीय क्षेत्र के लिए मान्यता प्राप्त वेंडर की संख्या भी बढ़कर 365 हो गई है।
प्रबंध निदेशक ने कहा की हमने नेट-मीटरिंग की व्यवस्था को सरल बनाया है, 10 किलोवाट से कम क्षमता के सोलर सिस्टम को तकनीकी व्यवहार्यता आकलन से बाहर रखा गया है
सौर कौथिग : यह क्यों आयोजित किया जा रहा है और इसका क्या मकसद है
प्रबंध निदेशक ने कहा कि इसके माध्यम से प्रदेशवासियों को सौर ऊर्जा के लाभों और योजनाओं से परिचित कराना और इससे ज्यादा से ज्यादा संख्या में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, क्योंकि रूफटॉप सोलर को अपनाने में जनजागरूकता बहुत अहम भूमिका निभाती है।
रूफटॉप सोलर से उपभोक्ताओं का बिजली बिल घटेगा और राज्य के स्वस्छ ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में प्रयासों को बल मिलेगा।
लोगों तक प्रत्यक्ष जानकारी पहुंचाने के लिए 16 और 17 दिसंबर को रेंजर्स ग्राउंड, देहरादून में सौर समृद्ध उत्तराखंड अभियान के तहत सौर कौथिग का आयोजन किया जा रहा है।
यह दो दिवसीय सौर मेला सुबह 10 बजे से रात नौ बजे तक चलेगा।
इस सौर कौथिग के माध्यम से रूफटॉप सोलर से जुड़े सभी हितधारकों को एक स्थान पर लाया गया है
इसमें पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर सिस्टम लगाने की सारी जानकारी मिलेगी, जिसमें एक घरों को सोलराइज करने का लक्ष्य
सौर कौथिग में आगंतुकों को सोलर वेंडर्स से सिस्टम को लगाने और बैंकों से वित्तपोषण विकल्पों के बारे में
आमने-सामने जानकारी लेने का मौका मिलेगा।
प्रबंध निदेशक ने कहा कि यहां पर ग्राहकों को रूफटॉप सोलर के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराने की भी सुविधा मिलेगी।सौर कौथिग में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना और सोलर हीटर से जुड़ी जानकारियां भी दी जाएंगी।
इस सौर कौथिग के साथ हम जन-जागरूकता के लिए कई नए प्रयास भी शुरू करने जा रहे हैं।
16 दिसंबर को मुख्यमंत्री इस सौर कौथिग के साथ जनजागरूकता के लिए सोलर वैन और म्यूरल आर्ट का उद्घाटन करेंगे।सौर कौथिग में प्रमुख विषयों पर परिचर्चा, रूफटॉप सोलर के यूर्जस के साथ बातचीत, स्कूल आर्ट और कॉलेज स्टार्टअप उत्तराखंड कंपटीशन साथ अन्य कार्यक्रम भी रखे गए हैं।
इन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी सौर ऊर्जा की तरफ लोगों का ध्यान खींचने का प्रयास किया जाएगा।
सौर कौथिग के दोनों दिन शाम में प्रदेश के जान-माने कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे और सौर ऊर्जा को अपनाने की अपील करेंगे, जन-जागरूकता के अब तक के प्रयासों से हमें काफी सफलता मिली है।


