बॉबी नेअनिल यादव की हाईकोर्ट में हो रही पैरवी के सरकारी खर्च पर उठाए सवाल
बॉबी ने बाहरी वकीलों पर करोड़ों खर्च किए जाने का किया दावा
सरकार के अधिवक्ता जनता की आवाज बनने के बजाय भ्रष्ट अधिकारियों की ढाल बन जाते हैं।
बॉबी पंवार ने कहा कि यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि सरकार द्वारा नियुक्त महाधिवक्ता और अन्य वकील भ्रष्ट अधिकारी की पैरवी करते नजर आ रहे हैं
उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पंवार ने मंगलवार को देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यूपीसीएल के विवादास्पद एमडी की। पैरवी में सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक अनिल यादव के खिलाफ दायर जनहित याचिका ठोस साक्ष्यों पर आधारित थी, लेकिन सरकार भ्रष्ट अधिकारी का बचाव कर रही है।
बॉबी पंवार भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज़ और प्रमाणों के साथ पत्रकारों के सामने पहुंचे और कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त महाधिवक्ता और अन्य वकील भ्रष्ट अधिकारी की पैरवी कर रहे हैं। वहीं, जनहित में याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सरकार के वकील भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं बल्कि हमारे खिलाफ खड़े हो गए।”
बॉबी पंवार ने आरोप लगाया कि यह सरकार की सुनियोजित रणनीति है। उन्होंने कहा कि जब वह न्याय की मांग लेकर कोर्ट जाते हैं, तो सरकार के अधिवक्ता जनता की आवाज बनने के बजाय भ्रष्ट अधिकारियों की ढाल बन जाते हैं।
पंवार ने यह भी कहा कि सरकार ने उनके खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत मुकदमे दर्ज कराए ताकि उन्हें चुप कराया जा सके। उन्होंने महाधिवक्ता पर निशाना साधते हुए कहा, “यह वही महाधिवक्ता हैं जिन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI जांच का विरोध किया था। अगर राज्य की बेटी को न्याय देने से कोई मुंह मोड़ सकता है, तो वह जनता की आवाज कैसे बन सकता है
बॉबी पंवार ने कहा कि यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि सरकार द्वारा नियुक्त महाधिवक्ता और अन्य वकील भ्रष्ट अधिकारी की पैरवी करते नजर आ रहे हैं, और जनहित में याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा “यह याचिका भ्रष्टाचार के खिलाफ थी, लेकिन सरकार और उसके वकील उसे याचिकाकर्ता के खिलाफ बना रहे हैं। हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ न्याय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी हमें सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया गया।”
बॉबी पंवार ने इस पूरे घटनाक्रम को सरकार की एक सोची-समझी रणनीति बताया ओर कहा कि जब हम न्याय के लिए कोर्ट जाते हैं, तो सरकार के अधिवक्ता जनता की आवाज बनने के बजाय भ्रष्ट अधिकारियों की ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं।” बॉबी पंवार ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके द्वारा लड़ी जा रही लड़ाई उत्तराखंड और जनहित के लिए है लेकिन सरकार ने जानबूझकर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगा कर उनके ऊपर मुकदमे दर्ज कर दिए ताकि जनता की आवाज को दबाई जा सके।
उन्होंने सरकार से यह भी सवाल पूछा कि “महाधिवक्ता की राज्य निर्माण में क्या भूमिका रही है?” और यह सवाल भी किया कि “जब सरकार के द्वारा महाअधिवक्ता से लेकर सरकारी वकीलों की लंबी फौज उच्च न्यायालय में है तो फिर बाहरी वकीलों की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? बॉबी पंवार ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा 20 -20 लाख रुपए प्रति सुनवाई के लिए बाहर से नियुक्त वकीलों को दिया जा रहा है जबकि यह पैसा उत्तराखंड के हर व्यक्ति का है। यह सब सवाल सरकार की मंशा और पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं।”
इसके साथ ही उन्होंने प्रेस वार्ता में पत्रकारों के सामने वकीलों पर खर्च हुए करोड़ों रुपए के भुगतान के साथ रहने एवं शराब के बिल के भुगतान का आंकड़ा भी रखा।
यह सरकारी धन का दुरपयोग का ब्यौरा बॉबी पंवार ने पत्रकारों के समक्ष सारे साक्ष्यों ओर सबूतों के साथ रखा।
उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के उपाध्यक्ष त्रिभुवन चौहान ने कहा कि “लड़ाई अब शुरू हुई है – और जब तक उत्तराखंड से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होता, हम चुप नहीं बैठेंगे।”
प्रेस वार्ता के दौरान उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के सैनिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष कैलाश देवरानी, उपाध्यक्ष त्रिभुवन चौहान, राजेंद्र भट्ट, मनोज कोठियाल और प्रमोद काला भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


