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भले खिसक गए हो सियासत में पांव पर उत्तराखंड में सपा का सियासी दांव, 35 सीटों पर ताल ठोकने की तैयारी

देहरादून। भले ही उत्तराखंड की सियासत में सपा के पांव खिसक गए हों मगर आगामी  विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी मजबूत राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने के लिए बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी प्रदेश की आधी यानी 35 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हाल ही में नियुक्त किए गए प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने बुधवार को देहरादून में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में साफ किया कि हालांकि पार्टी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने की इच्छुक है, हालांकि सीटों के बंटवारे और अंतिम स्वरूप पर मुहर राष्ट्रीय नेतृत्व ही लगाएगा।

गठबंधन और राजनीति

सपा प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने कहा कि यदि गठबंधन होता है, तो पार्टी अपने हिस्से की सीटों पर पूरी मजबूती और दम-खम से चुनाव लड़ेगी तथा सहयोगी दलों के उम्मीदवारों का भी पूरा समर्थन करेगी। पार्टी का मुख्य लक्ष्य युवाओं और महिलाओं को संगठन से जोड़कर राज्य में भारतीय जनता पार्टी को उखाड़ फेंकना है। इसके साथ ही, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के देहरादून और हरिद्वार दौरे को लेकर भी शीर्ष नेतृत्व से बातचीत चल रही है, और नवंबर या दिसंबर माह में उनके उत्तराखंड दौरे की संभावना जताई जा रही है

उत्तराखंड विस चुनावों में सपा का अब तक का प्रदर्शन

उत्तराखंड राज्य गठन (नवंबर 2000) के बाद से ही समाजवादी पार्टी यहां अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए संघर्ष करती रही है। शुरुआती दौर में कुछ सीटों पर पार्टी की स्थिति ठीक थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका जनाधार सिकुड़ता चला गया। साल-दर-साल चुनावों में सपा के प्रदर्शन को देखें तो वर्ष 2002 यानी राज्य के पहले चुनाव में सपा ने 50 से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को लगभग 6.30% से 7.89% तक वोट शेयर मिला था, जो अन्य क्षेत्रीय दलों के मुकाबले ठीक माना गया था, हालांकि पार्टी का कोई भी विधायक विधानसभा नहीं पहुंच पाया था। (ध्यातव्य है कि 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा के टिकट पर हरिद्वार से राजेंद्र कुमार बाड़ी ने जीत दर्ज की थी, जो राज्य में पार्टी की सबसे बड़ी सफलता थी)।वर्ष 2007 के चुनाव में सपा ने लगभग 42 सीटों पर चुनाव लड़ा। पार्टी का कुल वोट शेयर गिरकर करीब 5% के आसपास आ गया और पार्टी का खाता इस बार भी खाली रहा। वर्ष 2012 की बात करें तो समय के साथ पार्टी का ग्राफ लगातार गिरता गया। 2012 में सपा ने करीब 32 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए, लेकिन पार्टी का मत प्रतिशत गिरकर 1.4% पर सिमट गया और एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई। वर्ष 2017 का चुनाव सपा के लिए बेहद कमजोर साबित हुआ। पार्टी का वोट शेयर घटकर महज 0.4% रह गया और पार्टी दहाई आंकड़े तक सीटें जीतने में भी असफल रही। वर्ष 2022 यानी पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने लगभग 55 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, परंतु पार्टी को जनता का समर्थन नहीं मिला और उसका वोट शेयर गिरकर 0.29% – 0.3% के आसपास पहुंच गया। पार्टी एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई।

अब भविष्य की नई कोशिश

राज्य गठन के समय मजबूत स्थिति रखने वाली समाजवादी पार्टी का जनाधार पिछले दो दशकों में लगातार कमजोर हुआ है। अब नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी के नेतृत्व में पार्टी ‘इंडिया’ गठबंधन के सहारे और नए सामाजिक समीकरणों के साथ उत्तराखंड की  राजनीति में एक बार फिर अपनी खोई हुई सियासी जमीन और पहचान वापस पाने की कोशिश में जुटी है।

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