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सरकारी जमीनों की बिक्री पर कांग्रेस ने धामी सरकार को घेरा, राज्यपाल से की फैसले निरस्त करने की मांग

देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और बेशकीमती संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के मुद्दे पर कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

कांग्रेस ने की राज्यपाल से मुलाकात

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय पर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि इस निर्णय के जरिए विभिन्न विभागों की सरकारी जमीनों के संबंध में अंतिम फैसला लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के स्तर पर केंद्रित कर दिया गया, जो संवैधानिक प्रावधानों और कार्य नियमावली की भावना के विपरीत है। कांग्रेस ने कहा कि सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने और हस्तांतरित करने के फैसले संबंधित विभागों की सहमति और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत होने चाहिए।

कांग्रेस ने उठाया जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मुद्दा

कांग्रेस ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि हजारों करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली करीब 142 एकड़ जमीन और राष्ट्रीय धरोहर को 15 साल के लिए लगभग एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर निजी कंपनी को सौंप दिया गया। पार्टी ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि तीनों बोलीदाता कंपनियों का संबंध एक ही व्यक्ति से था। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने और लीज निरस्त करने की मांग की।इसके अलावा कांग्रेस ने उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) और सिडकुल को हस्तांतरित की गई सरकारी जमीनों का मुद्दा भी उठाया। ज्ञापन में पटवाडांगर, डाकपत्थर, आईडीपीएल ऋषिकेश, एचएमटी रानीबाग, रामगढ़, धनौल्टी समेत कई स्थानों की जमीनों का उल्लेख किया गया। कांग्रेस का आरोप है कि कुछ जमीनों का हस्तांतरण बिना स्पष्ट राजस्व अभिलेखों और पैमाइश के किया गया। वहीं, कई संपत्तियों के मूल्य और राजस्व साझेदारी को लेकर भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। पार्टी ने यूआईआईडीबी के तहत जारी तीन टेंडरों को तत्काल निरस्त करने और लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को पीपीपी मोड पर देने की प्रक्रिया रोकने की मांग की।

गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मुद्दा उठाया

सरकारी जमीनों के मुद्दे के साथ कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को भी राज्यपाल के सामने रखा। पार्टी ने कहा कि इस मामले में न्यायालय के निर्देशों के बावजूद सरकार की ओर से आवश्यक अनुमति देने में देरी की जा रही है। कांग्रेस ने तत्काल वैधानिक कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कीवहीं, कोरोना काल में सहकारिता विभाग में हुई भर्तियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। कांग्रेस ने कहा कि महामारी के दौरान हुई इन भर्तियों में कथित तौर पर अभ्यर्थियों से 20-20 लाख लेकर नौकरी देने के आरोप सामने आए थे। पार्टी ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही एमबीबीएस की सीटों पर कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए दाखिलों की भी समयबद्ध जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

कांग्रेस ने की सरकारी जमीनों से जुड़े फैसले निरस्त करने की मांग

कांग्रेस ने राज्यपाल से ज्ञापन प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर सरकारी जमीनों से जुड़े फैसले निरस्त करने और संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने साफ किया कि यदि सरकार इस अवधि में कार्रवाई नहीं करती है तो प्रदेश की संपत्तियों को बचाने के लिए कांग्रेस न्यायालय का रुख करेगी।

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